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Category : Post formats

04 Feb 2018

ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है, और तू मेरे गांव को गँवार कहता है।

ऐ शहर मुझे तेरी औक़ात पता है, और तू मेरे गांव को गँवार कहता है। थक गया है हर शख़्स काम करते करते, तू इसे अमीरी का बाज़ार कहता है। गांव चलो वक्त ही वक्त है सबके पास, तेरी सारी फ़ुर्सत तेरा रविवार कहता है। मौन होकर फोन पर रिश्ते निभाए जा रहे हैं, तू इस मशीनी दौर को परिवार कहता है। वो मिलने आते तो कलेजा साथ लाते थे, तू दस्तूर निभाने को रिश्तेदार कहता है। बैठ जाते थे […]