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स्वयं विचार करें

संत महापुरुष कहते है जब आप बस या ट्रेन में बिना टिकट सफर कर रहे होते हो तो कितना डर चिंता घबराहट हो रही होती है कहीं कोई टिकट चैक करने वाला ना आ जाये सारा सफ़र चिंता और बेचैनी में ही बीत जाता है। जो टिकट ले के सफर कर रहा होता है, वो खुशी-खुशी सफर कर रहा होता है। उसे कोई चिंता कोई घबराहट कोई परेशानी नही होती, उसका सारा सफर खुशी- खुशी बीत जाता है।

टिकट क्या है
टिकट भगवान का नाम है
यह जीवन भी जो नाम वाली टिकट लेके व्यतीत करता है वो खुशी-खुशी व्यतीत कर लेता है। और जो बिना नाम के जीवन व्यतीत करता है उसका जीवन चिंता घबराहट बेचैनी परेशानीयो में ही सारा जीवन कट जाता है।
स्वयं विचार करें​✍🏻✍🏻